History Of Insurance In The World In Hindi – बीमा का इतिहास

History of Insurance, बीमा का इतिहास. MudraXP एक Financial Blog है. यहां फायनेंस से संबंधित जानकारी सझा किया जाता है.

ऐसे में जरूरी है हम कुछ जरूरी बातें भी बताएं. आज हम आपको History of Insurance / बीमा का इतिहास बताने वाले हैं. वैसे तो बीमा के इतिहास का कोई साक्ष्य नहीं है लेकिन, विभिन्न वर्णनों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है.

बीमा की उत्पति अति प्राचीन काल में सभ्यता के विकास के साथ हुई. शुरुआती के समय में जब सिर्फ संयुक्त परिवार हुआ करता था. गिना चुना कोई एकल परिवार में रहता था.

यह संयुक्त परिवार प्रथा बीमा का ही एक स्वरूप था यदि परिवार किसी के साथ कोई अप्रिय घटना घाट जाता जैसे अपांग हो जाना, बेरोजगार हो जाना, बीमार हो जाना, मर जाना, ऐसे में उस व्यक्ति, उसकी पत्नी व बच्चों की देखभाल परिवार के अन्य लोग करते थे.

अब संयुक्त परिवार का प्रथा खत्म हो चुका है. आज के सन्दर्भ में बात करें तो पति पत्नी और बच्चा साथ रहना चाहते हैं. वही पति आज आपने भाई के साथ रहने को तैयार नहीं है तो कल के दिन उसका दो बेटा साथ कैसे रहेगा?

वर्तमान परिपेक्ष्य में संयुक्त परिवार का अस्तित्व खत्म होता नज़र आ रहा है. इसी वजह से बीमा की आवश्यकता शुरू हो गई और देखा जाये तो शायद यही कारण भी रहा होगा.

history of insurance
History of Insurance

History of Insurance

जीवन बीमा का शुरुआत ईसा पूर्व माना जाता है. कहा जाता है रोम के लोग जीवन बीमा से परिचित थे किन्तु आधुनिक स्वरूप के इंश्योरेंस का प्रारम्भ 1653 को हुआ.

विकिपीडिया के अनुसार लन्दन के श्री विलियम गिब्बन्स के जीवन का एक वर्ष का बीमा किया गया था. कहा जाता है कि मेसोपोटामिया व बेबीलोन में 3000 वर्ष पूर्व पहली बार बीमा प्रारम्भ किया गया.

ऐसा माना जाता है कि आधुनिक बीमा का विकास 13वीं शताब्दी में हुआ है. प्राचीनकाल में विदेशों के साथ माल का आवागमन अधिकांश समुद्री मार्ग से ही होता था, जो अनेक जोखिम से भरपूर था.

इन जोखिमों से बचाव हेतु व्यापारी लोगों ने एक समझौता किया, कि मार्ग में होने वाली हानि को व्यापारी हितों के अनुसार बांट लेंगें. इस प्रकार सर्वप्रथम सामुद्रिक बीमा व फिर अग्नि बीमा का विकास हुआ.

एडर्क्ड लायड नामक कॉफी विक्रेता ने लंदन में समुद्री बीमा को आधुनिक रूप प्रदान किया. 1666 में हुए लंदन के महान अग्निकाण्ड में जिसमें 13000 घर जलकर स्वाहा हो गये थे, ने बीमा को बढ़ावा दिया और 1680 में ‘फायर आफिस’ नामक पहली अग्नि बीमा कम्पनी का श्री गणेश हुआ.

History of Insurance in the World

प्राचीन समय से, बीमा हमारी भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है. बैंकिंग, निवेश और व्यापार की तरह, बीमा भी प्राचीन युगों के गहराई वाले इतिहास का दावा करती है.

इसे विस्तृत रूप से पेश करने के लिए, यदि एक तूफ़ान की वजह से किसी का घर टूटा हो या प्राकृतिक आपदा की वजह से किसी व्यक्ति को चोट लगी हो, तो पड़ोसियों और समुदाय के सदस्यों को मदद करने के लिए बाध्य किया जाता था.

आज भी भारत के गांवों में यह देखा जाता है. यह सहायता भोजन,आश्रय, संसाधने आदि के रूप मे आती थी. समय के साथ, यह प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो गई जिसे हम आज बीमा कहते हैं.

बीमा के बारे में मनुस्मृति, धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र के प्राचीन ग्रंथों मे लिखा गया है, जहां संसाधनों को एक जगह जुटाया जाता था. जब भी कोई आपदा आती थी, तो इन संसाधनों को समुदाय या गांव में परेशान लोगों के सहायता के लिए पुनार्वतित किया जाता था.

समय के साथ, भारतीयों ने बीमा के आधुनिक अवतार को बनाने के लिए अन्य देशों से बहुत अधिक उधार लिया.

History of Insurance in India

ज्ञान की शुरुआत भारत से हुई थी इसमें कोई संदेह नहीं है. हमारा देश और हम भारतीय प्राचीन काल से ही हर उस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो आज विदेशो से आ रहा है.

आपने सुना होगा दूर का ढोल सुहाना लगता है. बस ऐसा ही है. मूल रूप से इन्श्योयोरेन्स का साक्ष्य हमें भारतीय प्राचीन काल में देखने को मिलता है. आज इसका स्वरुप जरूर अलग हो गया है.

भारत में समुद्री एवं अग्नि बीमा का वर्तमान स्वरूप इंग्लैण्ड से आया है. भारत में जीवन बीमा का शुभारम्भ 1818 में कलकत्ता में ‘ओरिएन्टल लाइफ इन्श्योयोरेन्स कम्पनी’ की स्थापना के साथ हुआ.

इसके बाद साल 1823 में बॉम्बे लाइफ़ एश्योरेंस कंपनी और 1829 में मद्रास इक्वेटिव आश्वासन कंपनी की शुरुआत हुई. इसके बाद कई बीमा कंपनी अलग अलग वर्षों में शुरू हुआ कई बार नियम बना और बदला गया.

आखिरी में 1938 में सभी अधिनियमों को एकीकृत करके बीमा नियमन हेतु एक बीमा अधिनियम बनाया गया. समय के साथ 1956 में जीवन बीमा व्यवसाय का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया गया एवं व्यवसाय संचालन हेतु भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना की गई.

इसके साथ ही 245 देशी विदेशी बीमा कर्ताओं के व्यवसाय का अधिग्रहण कर जीवन बीमा निगम को सौंपा गया.

वर्ष 1971 में भारत के साधारण बीमा (General Insurance) व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. समुद्री, अग्नि व विविध बीमा करने वाली 107 कम्पनियों को अधिगृहित कर भारतीय साधारण बीमा निगम एवं इसकी चार सहायक कम्पनियों को सौंप दिया गया.

मार्च 2003 से साधारण बीमा निगम की चारों सहायक कम्पनियों को भी इससे अलग कर दिया गया. अब ये स्वतन्त्र कम्पनियों के रूप में बीमा व्यवसाय कर रही है.

बीमा की शुरुआत क्यूं हुई

एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए क्या चाहिए? वैसे यदि आप अमिताभ बच्चन के दीवाने हैं तो रोटी, कपड़ा और मकान बोलेंगें. लेकिन, क्या यही सब कुछ है.

आज के आधुनिक युग में सभी लोग एक बेहतरीन जीवन जीना चाहते हैं और यह उनका अधिकार भी है. एक आम इंसान कि जिंदगी सिर्फ जरूरत को पूरा करने में निकल जाता है.

अब्राहम मस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम पिरामिड के अनुसार, शारीरिक आवश्यकता जैसे भोजन और आश्रय मानव जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकता है. इससे अगला चरण है सुरक्षा, जैसे बारिश में छाता धूप में छांव, ठंढ में तन पर गर्म कपड़ा, आदि.

जीवन में कभी भी कोई भी संकट दरवाजे पर दस्तक दे सकती है. जब भी कोई संकट आता है तो बताता नहीं है मैं आने वाला हूं. यदि इन आकस्मिक संकट से बचना चाहते हैं तो बीमा जरूरी है.

आज के समय में बीमा जरूरत है. एक समय था जब लोग बीमा के बारें में सुनना भी पसंद नहीं करते थे. लेकिन, आज यही बीमा ऑनलाइन बिक रहा है.

बीमा हर तरह का होता है जैसे जीवन बीमा, मोटर बीमा, आग से सुरक्षा के लिए बीमा, फसल बीमा, होम लोन बीमा, टर्म प्लान, अब तो इस क्षेत्र में कई कंपनी काम कर रही है.

लेकिन, आज भी लोगों का भरोसा LIC (Life Insurance Corporation of India) के पास ही है. यदि LIC से संबंधित कार्य है तो नीचे कमेन्ट बॉक्स में जरूर पूछिए.

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Conclusion History of Insurance

भारतीय एलआईसी के नाम से अच्छी तरह से वाक़िफ़ हैं. यह दशकों से भारत की बीमा कंपनी रही है. भारतीय इसके विज्ञापनों को देखते और सुनते हुए बड़े हुए हैं.

कोलकाता में 1818 में स्थापित की गई ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी पहली बीमा कंपनी थी जिसने भारतीय जमीन पर काम करना शुरू किया था. वर्ष 1870 में, ब्रिटिश बीमा अधिनियम पारित किया गया, जिसने बीमा कंपनियों के स्वतंत्र कार्य को सुनिश्चित किया.

बॉम्बे लाइफ एश्योरेंस कंपनी की स्थापना 1870 में की गई थी, जिसने भारतीयों का बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम के बीमा किया. भारतीय जीवन बीमा कंपनी अधिनियम 1912 भ्रष्टाचार को कम करने के लिए पारित किया गया था.

बीमा अधिनियम 1938 जीवन और सामान्य बीमा दोनों को शामिल करने वाला पहला अधिनियम था.

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